ये झूठ है कि ज़िन्दगी से कुछ गिला ही नही,
चाहने वाला कोई शख्स क्यू मिला ही नहीं।।
तमाम उम्र भटकता रहा सफर में ही.......,
मोड़ ही मोड़ मिले ठौर बस मिला ही नही।।
हर कोई खुशबू बनके महकता है गुलशन मे,
मैं ऐसा फूल रहा आज तक खिला ही नही।।
~~~~ सुनिल #शांडिल्य
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