Tuesday, May 14, 2024

बार बार संवारता हूं,बारबार बिखर जाती है
ये ज़िन्दगी है,हाथ आती ही नहीं है

इससे कोई क्या रखे उम्मीद
करीब दिखती है मगर,बेवफाई कर जाती है

उम्रभर ढ़ूंढ़ता रहा इसका पता
निगोड़ी साथ रहके भी नज़र नहीं आती है

कभी मिले तो कहना #शांडिल्य याद करता है
ये वो शै है,जो मिलती है तो,जान ले जाती है

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

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