Tuesday, May 7, 2024

थक  गये  हम  राही  तेरे  राह में,
खो दिया  सुख चैन तेरी  चाह में।

भूलकर भी हम भूल सकते नहीं,
बखश दो हमें दो कदम पनाह में।

मुश्किल बहुत रहना उनके बिना,
कर दो रहम रख लो हमें छाँव में।

आ गई वो घड़ी कह दूँ मनसीरत,
बाँध लो दायरे में अपनी बाँह में।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

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