दिलों को दिलों से मिलाती हैं आँखें
जो कल तक गुज़रती थीं नज़रें बचा कर
वो छुप छुप के हमसे लड़ाती हैं आँखें
ज़रा मुस्कुरा कर जो देखा पलट कर
अजब दिल में हलचल मचाती हैं आँखें
समझदारी चलती नहीं इनके आगे
उतर कर ये दिल में नचाती हैं आँखें
~~~~ सुनिल #शांडिल्य
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