Monday, August 12, 2024

दूर क्यों बैठे गुमसुम होकर,
मन में मत शरमाहट लाओ

ग़लतफ़हमी हम दूर करेंगे 
ग़र अनजानी आहट लाओ

माना मौसम सर्द हुआ पर, 
दर्द -ए-दिल क्यों सहमा-२

महफ़िल में है शोर शबनबी,
मधुबन में नरमाहट लाओ

सुनो हवाओं सर-सर चलकर,
कानाफूसी बंद करो तुम,

मेरा मन तो भावों से भीगा,
तन में कुछ गरमाहट लाओ

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

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