दूर क्यों बैठे गुमसुम होकर,
मन में मत शरमाहट लाओ
ग़लतफ़हमी हम दूर करेंगे
ग़र अनजानी आहट लाओ
माना मौसम सर्द हुआ पर,
दर्द -ए-दिल क्यों सहमा-२
महफ़िल में है शोर शबनबी,
मधुबन में नरमाहट लाओ
सुनो हवाओं सर-सर चलकर,
कानाफूसी बंद करो तुम,
मेरा मन तो भावों से भीगा,
तन में कुछ गरमाहट लाओ
~~~~ सुनिल #शांडिल्य
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