शीतल आम की छांव में
कुछ तुम कहना कुछ हम
गौर से सुनना उन चिड़ियों
की चहचाहट में...
कौवे की कांव कांव में
और पास फुदकती
उस मैना की शर्माहट में
उस गाँव की सौंधी मिट्टी में
जो हमसे बहुत दूर छूट गई है।।
याद है न हम कितना लड़ते थे
इसी पेड़ की कसम खाकर
~~~~ सुनिल #शांडिल्य
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