कितने मेरे पास हो तुम
सबसे मेरे खास हो तुम
विस्मृत सारे दृश्य हो गए
कितना सुंदर एहसास हो तुम
मै अकिंचन खड़ा हुआ
द्वार पे तेरे अड़ा हुआ
आतुर..छवि को निहारूँ मै
कितना मनमोहक आभास हो तुम
दृग कितने हैं चंचल तेरे
हिय में करते हलचल मेरे
मदमाते अधरों पर रक्त वर्ण
मुखड़ा, लिए सुहास हो तुम
शीत ऋतु सा शीतल मन है
गर्माहट में पुरवाई पवन है
वासंती बयार लिए
दिखते प्यारा मधुमास हो तुम
~~~~ सुनिल #शांडिल्य
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