Thursday, November 7, 2024

कितने मेरे पास हो तुम
सबसे मेरे खास हो तुम
विस्मृत सारे दृश्य हो गए
कितना सुंदर एहसास हो तुम

मै अकिंचन खड़ा हुआ
द्वार पे तेरे अड़ा हुआ
आतुर..छवि को निहारूँ मै
कितना मनमोहक आभास हो तुम

दृग कितने हैं चंचल तेरे
हिय में करते हलचल मेरे
मदमाते अधरों पर रक्त वर्ण
मुखड़ा, लिए सुहास हो तुम

शीत ऋतु सा शीतल मन है
गर्माहट में पुरवाई पवन है
वासंती बयार लिए 
दिखते प्यारा मधुमास हो तुम

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

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