Tuesday, January 21, 2025

आपकी याद आती रही रात भर
रागिनी गुनगुनाती रही रात भर।

शम्मा बेचैन थी कुछ परेशाँ भी थी
उसकी लौ टिमटिमाती रही रात भर।

एक तन्हा सी शब थी उदासी मेरी
चूडियां खनखनाती रहीं रात भर।

चाँद उलझा रहा उलझनों मेंं कहीं
चाँदनी मुस्कुराती रही रात भर।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

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