आपकी याद आती रही रात भर
रागिनी गुनगुनाती रही रात भर।
शम्मा बेचैन थी कुछ परेशाँ भी थी
उसकी लौ टिमटिमाती रही रात भर।
एक तन्हा सी शब थी उदासी मेरी
चूडियां खनखनाती रहीं रात भर।
चाँद उलझा रहा उलझनों मेंं कहीं
चाँदनी मुस्कुराती रही रात भर।
~~~~ सुनिल #शांडिल्य
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