तेरी एक झलक पाने की खतिर ऐसे तरसे !
जैसे बिन मौसम के ज़मी पे बादल बरसे !
सुबह से शाम हुई तेरे आने के इंतेजार मे !
आंखे ढूब गई दिव्या दर्शन के दीदार मे !
ऐसे जूल्म सितम ना किया करो मेरे साथ !
बस दिख ही जाया करो चाहे दिन हो य़ा रात !
~~~~ सुनिल #शांडिल्य
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