Wednesday, January 22, 2025

तेरी एक झलक पाने की खतिर ऐसे तरसे  !
जैसे बिन मौसम के ज़मी पे बादल बरसे !

सुबह से शाम हुई तेरे आने के इंतेजार मे !
आंखे ढूब गई दिव्या दर्शन के दीदार मे !

ऐसे जूल्म सितम ना किया करो मेरे साथ ! 
बस दिख ही जाया करो चाहे दिन हो य़ा रात !

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

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