Monday, January 27, 2025

जबसे वो बनने संवारने लगी हैं।
बहुत खूबसूरत वो लगने लगी हैं।।

लगती जन्नत की वह तो हूर जैसी।
सबकी नजर उसपर टिकने लगी हैं।।

धड़कती है धड़कन जब देखे उसे हम।
देखते है तो नजरे बहकाने लगी हैं।।

खुदा का करम है  ग़ज़ब हुस्ना तेरा।
दिन-ब-दिन और‌‌ तू निखरने लगी हैं।।

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

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