Thursday, January 9, 2025

शबनम की बूँदे पंखुड़ियों पर चमक रही हैं,
खिल रही हैं कलियाँ फिजायें महक रही हैं |

सुबह की धूप छनकर जैसे हौले से आ रही,
पक्षियों के कलरव से साखायें चहक रही हैं |

सरका क्या ऑंचल धीरे से उसके कंधे से,
ठिठक गयी नज़रें पर एहसासें बहक रही हैं |

~~~~ सुनिल #शांडिल्य

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