वादियों में ठंडे कोहरे की तरह, ज़हन में उतरता है कोई
वसंत के फूलों की तरह, मन में महकता है कोई,
धुंध बन रही फिर किसी हसीं मुलाकात का ताना बाना
कड़ाके की ठंड सा बदन में उतरता है कोई
इश्क की मस्ती सा रूह में ढलता है कोई
साथ महबूबा का पाकर बिन पिए बहकता है कोई
#शांडिल्य
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