Tuesday, June 17, 2025

उलझ गया है वो फिर से उन्ही सवालों में 
और जवाब बंद हैं सारे ही उनके तालों में ।

दर्द बांटे तो तुम्हें प्यार भी मिल जायेगा 
भीड़ आज बड़ रही है बस शिवालों में ।

छटेंगी धुंध लो दिनकर भी निकल आए हैं 
ढूँढ  ही लेंगे तुम्हें हम आज घने जालों में।

#शांडिल्य

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