सृजन सुहाने सभी हों, सरस सु-सौंदर्य भी हों।
सु-मधुर कल्याण-कारी, भुवन भरे.. भाव धारी॥
कृति अपनी कामना से, शुभ रखता भावना से।
कुशल सरोकार..जो है, पटु..रचना-कार वो है ॥
सजग सु-निर्माण भाते, हृदय..क्षुधा बाँध पाते।
कुशल सरोकार ध्यावें, प्रभु सत-उद्धार भावें॥
#शांडिल्य
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