Tuesday, July 22, 2025

महकी-महकी याद तुम्हारी अनुरागी मन में ।
छलक पडे़ आँखों से आँसू अगन लगी तन में।।

ताक रहा विरहाकुल-व्याकुल आयेंगे बादल।
नेह राग की पाती पाकर गायेंगे बादल।।

उतर गगन से चाह बिजलियाँ चमकी आँगन में।
महकी-महकी याद तुम्हारी अनुरागी मन में।।

#शांडिल्य

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