Monday, July 28, 2025

एक शोर सुनाई देगा 
मन का चोर दिखाई देगा

तुम रुकना नही 
तुम झुकना नही

तुम चलना कुछ ऐसे 
नदियाँ चलती हो अंचल से जैसे

तुम थकना नही 
तुम बहकना नही

तुम लिखना मन से मन को 
जैसे मीरा लिखती है वृन्दावन को..!!

#शांडिल्य

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