Thursday, August 14, 2025

सुनो,
हमसफ़र नहीं हो तुम
फिर भी कहीं न कहीं
सफर कर रहे हो तुम मेरे साथ हमेशा।
 
कभी बर्फीली पहाड़ियों पर,
कभी आसमान की बुलंदियों पर,
कभी मेरे सामने बैठे हो
तो कभी दूर खड़े मुस्करा रहे हो।

कभी दुनिया की भीड़ में
कभी रात की तनहाई में
कभी मेरी यादों में, कभी मेरे ख्यालों में।

#शांडिल्य 

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