"रविवार की सुबह —"
बिस्तर अभी तक
तेरी नींद से महक रहा है,
धूप खिड़की से नहीं —
तेरी यादों से छनकर आई है।
किताब जो खुली है,
उसमें कुछ अल्फ़ाज़ हैं
जो मैंने नहीं लिखे...
शायद वो तेरे ख्वाबों से उतरे हैं।
मेरा कप नहीं —
तेरा इंतज़ार ठंडा हो रहा है,
और ये कमरा…
अब भी तुम्हारा नाम लेता है
हर साँस में।
सच कहूं,
ये रविवार की सुबह नहीं —
तेरे बिना एक
अधूरा दिन है।
#शांडिल्य
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