Sunday, August 17, 2025

"रविवार की सुबह —"

बिस्तर अभी तक
तेरी नींद से महक रहा है,
धूप खिड़की से नहीं —
तेरी यादों से छनकर आई है।

किताब जो खुली है,
उसमें कुछ अल्फ़ाज़ हैं
जो मैंने नहीं लिखे...
शायद वो तेरे ख्वाबों से उतरे हैं।

मेरा कप नहीं —
तेरा इंतज़ार ठंडा हो रहा है,
और ये कमरा…
अब भी तुम्हारा नाम लेता है
हर साँस में।

सच कहूं,
ये रविवार की सुबह नहीं —
तेरे बिना एक
अधूरा दिन है।

#शांडिल्य

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