Friday, August 29, 2025

प्रियतम के दर्शन की आशा 
पीतवर्ण को करें गुलाबी 
जैसे सुरज की किरण सुनहरी
निकल खिला दें कमल गुलाबी

नैननकी अनकही वेदना
निर्झरबन‌ कपोल को चूमें
धारा का अल्हड़पन उरकी
सीमाओं को बढ़कर चूमें

अलसाई बोझिल पलकोंका 
दिल-थिर खुलना और झपकना 
अंबर से दो-दो तारों का 
टूट- टूट कर गिरना

#शांडिल्य

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