मेरी थाम लो तुम हृदय डोर सजनी
न पाओगी तुम प्रेम का छोर सजनी।
बँधी दिल के बन्धन हमारी उमंगें
कभी भाव मन की कटी जो पतंगें
भिगोती हैं पलकें प्रणय कोर सजनी
चलो हाथ थामे छुएं नील नभ को
नहीं रास आता पिया साथ सबको
यहाँ दांव पेचों का है शोर सजनी।
मेरी थाम लो तुम हृदय डोर सजनी।
#शांडिल्य
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