सुनो ना....
जानता हूँ,
तुम क्यूँ वो नहीं लिखती
जो मैं पढ़ना चाहता हूँ,
तुम क्यूँ वो नहीं कहती
जो मैं सुनना चाहता हूँ,
डरती हो ना !
कि हृदय से प्रेम छलक न जाए
कहीं तुम्हारे अनकहे शब्द मुझसे
प्रेम की रीत कह न जाए
कहीं तुम्हारे अनछुए स्पर्श
मुझे महसूस न हों जाए
#शांडिल्य
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