उमड़ घुमड़ कर अंतर्मन में
बन जाऊं उत्साह उमंग
कामनाओं की शुभता से
भरूं खुशियों के नवरंग
दृष्टि के आलोक में सदा
शीर्षक बन सामने आऊं
गीत के भव्य छंद सजाकर
स्वरों का लय बन गाऊं
मुस्कान बन संप्रेषण की
बनूं संवाद की प्रेरक भाषा
अभिव्यक्ति का सेतु बनना ही
है मेरे जीवन की अभिलाषा
#शांडिल्य
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