Tuesday, September 2, 2025

दिन चिकने अरु रात सुहानी,धूप दीवानी हो गई 
शीत ग्रीष्म की हुई सगाई,ऋतुराज अगवानी हो गई 

वन उपवन गदराये यौवन,आम्र मंजरी स्वर्णमयी 
कोयल बोल प्रीत के बोले,स्वर बड़े ही कर्णमयी 

टेसू दहक रहे कानन में,खेत मेड़ पर भी फूले 
खड़े सेमरा मुकुट पहिन कर,लगते हैं जैसे दूल्हे 

#शांडिल्य

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