स्पर्श तुम्हारा
जैसे जीवन धारा
है जग सारा...
खिलती कली,
कर्णप्रिए काकली,
खुशी विरली...
मैं डूब चला,
हूँ सबकुछ भुला,
स्पर्श मिला...
स्पर्श तुम्हारा
जैसे जीवन धारा
है जग सारा...
तेरे नयनों के
स्पर्श बिना
मेरी हर रचना अधूरी है
तुम्हारा स्पर्श
मेरे लिए एक काव्य है
#शांडिल्य
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