सरस सृजन की संगिनी हो प्रीत का प्रसार तुम
अनुरक्त हृदय की रागिनी हो स्वप्न का सँसार तुम
कुमुद कोमल कामिनी हो प्रणय की पुकार तुम
मुक्त मुग्ध मंदाकिनी हो मन्मथ की मनुहार तुम
चपल चँचल चाँदनी हो वैभव का विस्तार तुम
सदा शुभ्र सुहासिनी हो अनंग का अवतार तुम
#शांडिल्य
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