रंग नहीं, पानी नहीं,
उजाला नहीं, अँधेरा नहीं,
ताप नहीं, शीतलता नहीं,
सुगंधा है सिर्फ अनुभूति भर के लिए
प्रेम
साँस नहीं, धड़कन नहीं,
चेतना नहीं, स्पर्श नहीं,
स्पन्दन नहीं, अभिव्यक्ति नहीं,
देह नहीं - सिर्फ आत्मा है
परम तृप्ति और मोक्ष के लिए।
#शांडिल्य
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