Thursday, December 4, 2025
भुलाकर
सारे दर्द और ग़म ज़िन्दगी के
एकबार फिर से नादान होना चाहता हूँं...
मुस्कुराहटों के
उन्मुक्त गगन में
परिंदा अंजान होना चाहता हूँं...
भूलकर उदासियां और तकलीफों के किस्से....
कुछ पलो के लिए गलतियो में
गुमनाम होना चाहता हूँ.....
#शांडिल्य
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