Tuesday, December 16, 2025

नैनो मे भरकर चांद के दीदार की हसरत 
आसमान को एकटक निहारती वो रात
गुमसुम सी खामोश सी .वो रात

ओढ़कर अंधेरे की स्याह चादर
चाँद का इन्तजार करती वो रात
गुमसुम सी खामोश सी वो रात

बावरी है निरी पगली है शायद
नही पता उसे ये बात
रोज रोज कब होती है पूनम सी वो रात

#शांडिल्य

No comments:

Post a Comment