Thursday, December 18, 2025
दर्द का कतरा कतरा पी कर
ख़्वाब न जाने कितने देखें हैं
रातों के स्याह सन्नाटों में
कई लोग टूटते देखें हैं
यूँ ही नहीं ये आँसू छलका है
हर रोज़ तमाशे देखें हैं
नींद की स्याही खो-खो कर
कुछ जज़्बात डूबते देखें हैं...
#शांडिल्य
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