Saturday, January 17, 2026

कवि की प्रेयसी, स्वप्नों की मूरत,
कल्पनाओं में बसी, भावों की सूरत।

शब्दों की गहराई, मंद मौन मुस्कान,
धड़कनों में बसी, अनजानी पहचान।

कभी चांदनी में, कभी घटाओं में,
बसती है वह मन की गहराइयों में।

अनकही बातों का सजीव चित्रण,
उसके बिना अधूरा कवि का सृजन।

#शांडिल्य

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