Monday, January 19, 2026

जुबां मौन है पर नजर बोलती है,
दबे दिल के राज सहज खोलती है ।

कभी पास बैठो निहारो इन नजर को,
ए बिना शब्द के भी गजब बोलती है ।

निहारोगे जितना इन आंखो मे मेरी,
मुहब्बत मे उतना ए शहद घोलती है ।

शब्दो को अधरों पर कभी तुम न लाना,
सुनना और कहना जो नजर बोलती है। 

#शांडिल्य

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