जुबां मौन है पर नजर बोलती है,
दबे दिल के राज सहज खोलती है ।
कभी पास बैठो निहारो इन नजर को,
ए बिना शब्द के भी गजब बोलती है ।
निहारोगे जितना इन आंखो मे मेरी,
मुहब्बत मे उतना ए शहद घोलती है ।
शब्दो को अधरों पर कभी तुम न लाना,
सुनना और कहना जो नजर बोलती है।
#शांडिल्य
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