बारिश की बूंदें याद कर रही तुझे
तेरे एहसासों की याद दिला रही मुझे
बेबस निगाहें याद कर रही तुझे
सुनी बांहे मेरी याद कर रही तुझे
दर्द है गम है जाने क्या क्या है मुझमें
सबसे खास है तेरी कमी खल रही मुझे
अहसास का समंदर उमड़ा पड़ा है अंदर
तेरी पनाहों की जरूरत अब हो रही मुझे।
#शांडिल्य
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