पतझड़ आते ही रहते हैं..
की मधुबन फिर भी खिलते !!
फूलों की महक से भ्रमर ललचाए!
रेत के नीचे जल की धारा!!
हर सागर का यहाँ किनारा!!
रातों के आँचल में.. छुपा है सूरज प्यारा !
मैं बन जाऊं नज़र तुम्हारी..
दे दो मुझको ज़िम्मेदारी!!
तुम मेरी आँखों से.. देखो दुनिया सारी!!
#शांडिल्य
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