सुनो—
जब तुम गुस्सा होती हो,
तो लगता है जैसे
रात का चाँद अपनी रोशनी भूल गया हो,
नदियाँ अपने किनारे छोड़ गई हों
और ऋतुएँ अपनी पहचान खो बैठी हों।
तुम्हारे गुस्से से
मेरी ज़िंदगी की सारी कड़ियाँ
एकदम बिखर जाती हैं
मत करो यूँ मुझसे रूठने की सज़ा,
ये दिल तुम्हारी मुस्कान का बंदी है।
#शांडिल्य
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