Monday, March 23, 2026

इन हथेलियों की लकीरों में
सिर्फ आटा नहीं,
रिश्तों की गहराई गूँथी जाती है।
लकड़ी की हर चोट, जैसे कोई प्राचीन मंत्र,
धरती के सीने से उठता—
मेहनत का संगीत, और उत्सव का स्वर।
यह चक्की नहीं,
समय का चक्र है"
जहाँ परंपराएँ पिसती हैं,
और प्रेम अनन्त रोटी बनकर
पीढ़ियों को तृप्त करता है.♥️

#शांडिल्य

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