Saturday, March 28, 2026

"ए सुनो.....
तुम्हारी मुस्कान—
एक दैवीय संगीत बनकर
मेरे शब्दों की तहों में उतरती है।

तुम्हारी हर बात,
जैसे अदृश्य मृगमरीचिका,
मन के गहरे कुंड में सिहरन जगाती है।

और मैं........
असमंजस और सम्मोहित,
सिर्फ तुम्हारे होने का अनुग्रह गिनता हूँ।

शब्द यहाँ विफल हैं—
पर तुम्हारे नयनों की गूँज,
मेरे चेतन में अनन्त काव्य बनकर
धड़कती रहती है। 

#शांडिल्य

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