Monday, April 27, 2026
तू मरीचिका…
मैं मृग, प्यासा और भटका हुआ।
तू अनंत राहों की मंज़िल…
मैं, सिर्फ़ थकी आँखों में तेरा सपना लिए, चलता हुआ।
तू छाया की तरह दूर..
मैं धूप की तरह अकेला।
तू आग की तरह जलती…
मैं राख बनकर तुझ तक पहुँचने की आस में।
#शांडिल्य
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