Sunday, July 12, 2026
रातों के सन्नाटों का शोर हूँ
मरघट का मौन अघोर हूँ मैं
मृत्यु की कोख से हूँ जन्मा
चिता की राख में हूँ मैं रंगा
नाद हूँ मैं शिव के डमरू का
जंगल में जीवंत अघोर हूँ मैं
श्रापों का मैं श्रृंगार करता
मोक्ष के मार्ग का अघोर हूँ मैं
#शांडिल्य
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