Friday, August 28, 2026

बिसात पर मोहरे सभी बराबर लगते हैं,
वक़्त की चाल चले तो रिश्ते बदलते हैं।
राजा भी यहाँ अपनी चाल में मजबूर है,
प्यादा बढ़ता रहे तो मंज़िल दूर नहीं।

कुछ चालें जीत देती हैं, कुछ सबक दे जाती हैं,
शतरंज की तरह ज़िंदगी भी चालें सिखाती है।
हार से घबराना नहीं, खेल अधूरा मत छोड़,
कभी एक छोटी-सी चाल भी बाज़ी पलट जाती है।

#शांडिल्य

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