Sunday, December 7, 2014

ज़िक्र उनका ही आता है मेरे फ़साने में;
जिनको जान से ज्यदा चाहते थे हम किसी ज़माने में!
तन्हाई में उनकी ही याद का सहारा मिला;
जिनको नाकाम रहे हम भुलानें में!

जिन्दगी की किताब के, पड़ चुके स्याह पन्नों पर, क्यूँ रंग भरना चाहते हो!!
दफ़न हो चुकी यादों, को क्यूँ हक़ीकत, बनाना चाहते हो!!
जिगर के खाली कोने को, अपनी मीठी बातों से, क्यूँ भरना चाहते हो!!
मंज़िल की तरफ़ बढ़ रही, हूँ, क्यूँ अब उस रास्ते पे, साथ चलना चाहते हो!!

Friday, December 5, 2014

यह घर अब मेरा नहीं!!
जर्जर है दरो दीवारो का पता नहीं!!
रहते इन्सान पर आत्मा का पता नहीं!!
दुख है यहाँ खुशियों का बसेरा नहीं!!
गरूर भरे सब दिल में स्नेह रहा नहीं!!
रात गहरी अब यहाँ कोई सवेरा नहीं!!

ना जाने अब किधर गया हु मै
खुद से ही बिछड़ गया हु मै
कोई याद नहीं करता मुझको अब
क्या वक़्त स पहले ही मर गया हु मै
तू नहीं मिलता मुझसे पहले सा
क्या तेरे दिल से भी उतर गया हु मै
तेरे साथ मेरी तस्वीर बना दे कोई
प्यार के रंग लिए फिर रहा हु मै
जिन्दगी अब कुछ नया नहीं लाती
पुरानी यादो से लड़ रहा हु मै


डर डर भटकते है अरमान की तरह,
हर कोई मिलता है अनजान की तरह।
इस दुनिया से खुशी की आस क्या रखनी,
यहाँ तो ग़म भी देते है एहसान की तरह।

मत रोना इतना के हँसना मुश्किल हो जाए,
मत हँसो इतना के रोना मुश्किल हो जाए।
किसीको चाहना अच्छी बात है,
मगर मत चाहना इतना के,उसे भुलाना मुश्किल हो जाए।

क्यों रात-दिन रोते हो उसके लिए,
जो न था तुम्हारा एक पल के लिए।
अश्कों से कहो, अब थम भी जाएँ,
मैं हूँ तुम्हारा, तुम्हे जीना है मेरे लिए।