Monday, December 8, 2014
अब है ख़ुशी ख़ुशी में न ग़म है मलाल में
दुनिया से खो गया हूँ तुम्हारे ख़याल में
मुझ को न अपना होश न दुनिया का होश है
मस्त होके बैठा हूँ तुम्हारे ख़याल में
तारों से पूछ लो मेरी रुदाद-ए-ज़िन्दगी
रातों को जागता हूँ तुम्हारे ख़याल में
दुनिया को इल्म क्या है ज़माने को क्या ख़बर
दुनिया भुला चुका हूँ तुम्हारे ख़याल में
दुनिया से खो गया हूँ तुम्हारे ख़याल में
मुझ को न अपना होश न दुनिया का होश है
मस्त होके बैठा हूँ तुम्हारे ख़याल में
तारों से पूछ लो मेरी रुदाद-ए-ज़िन्दगी
रातों को जागता हूँ तुम्हारे ख़याल में
दुनिया को इल्म क्या है ज़माने को क्या ख़बर
दुनिया भुला चुका हूँ तुम्हारे ख़याल में
-बहज़ाद लखनवी
आप जब आँखों में आकर बैठ जाते हैं
नींद के मुझसे फरिश्ते रुठ जाते हैं
आपके हँसने से मेरी साँस चलती है
आपके रोने पे तारे टूट जाते हैं
आपका जब पल दो पल का साथ मिलता है
मेरे पीछे सौ ज़माने छूट जाते हैं
आप जब मुझको इशारे से बुलाते हैँ
हम ख़ुशी में सच है चलना भूल जाते हैं
आपके संग होटोँ पे मुस्कान रहती है
आपके बिन हँसते पौधे सूख जाते हैं
रुठने से आपके तो कुछ नहीँ होता
जान जाती है मेरी जब दूर जाते हैं
आपकी नज़दीकियाँ मदहोश करती हैं
आपकी आँखों में सागर डूब जाते हैं ।
नींद के मुझसे फरिश्ते रुठ जाते हैं
आपके हँसने से मेरी साँस चलती है
आपके रोने पे तारे टूट जाते हैं
आपका जब पल दो पल का साथ मिलता है
मेरे पीछे सौ ज़माने छूट जाते हैं
आप जब मुझको इशारे से बुलाते हैँ
हम ख़ुशी में सच है चलना भूल जाते हैं
आपके संग होटोँ पे मुस्कान रहती है
आपके बिन हँसते पौधे सूख जाते हैं
रुठने से आपके तो कुछ नहीँ होता
जान जाती है मेरी जब दूर जाते हैं
आपकी नज़दीकियाँ मदहोश करती हैं
आपकी आँखों में सागर डूब जाते हैं ।
--सिराज फ़ैसल ख़ान
Sunday, December 7, 2014
खुशबू जैसे लोग मिले अफ़साने में
एक पुराना खत खोला अनजाने में
जाना किसका ज़िक्र है इस अफ़साने में
दर्द मज़े लेता है जो दुहराने में
शाम के साये बालिस्तों से नापे हैं
चाँद ने कितनी देर लगा दी आने में
रात गुज़रते शायद थोड़ा वक्त लगे
ज़रा सी धूप दे उन्हें मेरे पैमाने में
दिल पर दस्तक देने ये कौन आया है
किसकी आहट सुनता है वीराने मे ।
एक पुराना खत खोला अनजाने में
जाना किसका ज़िक्र है इस अफ़साने में
दर्द मज़े लेता है जो दुहराने में
शाम के साये बालिस्तों से नापे हैं
चाँद ने कितनी देर लगा दी आने में
रात गुज़रते शायद थोड़ा वक्त लगे
ज़रा सी धूप दे उन्हें मेरे पैमाने में
दिल पर दस्तक देने ये कौन आया है
किसकी आहट सुनता है वीराने मे ।
-- गुलज़ार
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