Thursday, August 13, 2015

रोने दे तु आज हमको तु आँसु बहाने दे..
बाहो मे ले ले ओर खुद को भीग जाने दे..
है जो सीने मे कैद दरिया वो छुट जायेगा
है इतना दर्द कि तेरा दामन भीग जायेगा

कहाँ गए वो रंग,
जो लाये थे हम और तुम,
चुन चुन कर,
इस झोली में .

तुमने भी तो नहीं चुराए हैं,
फीके-फीके जो लग रहे हो,
कुछ तो बताओ,
क्यों रह गए अब,
सिर्फ..
श्वेत और श्याम .

Wednesday, August 12, 2015

हां, देखा है मैंने दर्द..
जब कोई अचानक पास आकर
हो जाता है दूर
तब होता है दर्द

जब
कोई बहुत खास होने का दावा कर
नहीं रह जाता है आम
तब होता है दर्द

जब
किसी के बहुत पास होकर भी
सताता है दूर होने का गम
तब होता है दर्द

कोई आँसू बहाता है, कोई खुशियाँ मनाता है
ये सारा खेल उसका है, वही सब को नचाता है।
बहुत से ख़्वाब लेकर के, वो आया इस शहर में था
मगर दो जून की रोटी, बमुश्किल ही जुटाता है।
घड़ी संकट की हो या फिर कोई मुश्किल बला भी हो
ये मन भी खूब है, रह रह के, उम्मीदें बँधाता है।
मेरी दुनिया में है कुछ इस तरह से उसका आना भी
घटा सावन की या खुशबू का झोंका जैसे आता है।
बहे कोई हवा पर उसने जो सीखा बुज़ुर्गों से
उन्हीं रस्मों रिवाजों, को अभी तक वो निभाता है।
किसी को ताज मिलता है, किसी को मौत मिलती है
ये देखें, प्यार में, मेरा मुकद्दर क्या दिखाता है।

Sunday, August 9, 2015

" डर लगता है "

सपना पूरा होने से डर लगता है
अब तो रोने से भी डर लगता है
जीवन का अर्थ ना समज आया मुजे
अब तो खुद के होने से भी डर लगता है
झुंड से भी परेशान होता हूँ
अब तो एक छोटे से कोने से भी डर लगता है
समंदर की लहेरो को देखता हु
अब तो किनारे से भी डर लगता है
वक़्त भी बेचैन करता है
अब तो सोने से भी डर लगता है
सपना पूरा होने से डर लगता है

अब तों रोने से भी डर लगता है 

अब हकीकत आ गयी है सामने,
जब खुली लोई सभी के सामने .

दाग बदनामी का फ़िर तोहफ़ा दिया,
हम से जुड़ कर इस तुम्हारे नाम ने .

क्यों खिलौना बीच रस्ते में रुका,
कम भरीं फ़िर चाभियाँ क्या राम ने .

क्यों मयूरा सबके सम्मुख रो रहा,
दिख चुके क्या पैर सबके सामने .

अपने कर्मों से कभी वह मर चुका,
बन खडा हैं प्रेत सबके सामने .

खोखले वादों का झोला फ़ट गया,
उफ़ ,फ़ज़ीहत कर दई इस झाम ने .

Saturday, August 8, 2015

ढूंढ़ता था कि कौन मेरा साथ निभायेगा साये की तरह,
सोचता था कि कौन मेरे जज्बातों को समझेगा यहाँ,
पर जब खयाल आया उनका जिन्होने हमे कभी अकेला नही छोडा,
तो लगा इन " तन्हाइयों " से अच्छा साथी मुझे मिलेगा कहाँ