Saturday, February 20, 2016

तुम कह ना सके, हम रो ना सके, 
दिल पहले जैसे हो न सके
तुम खामोश हो, हम शर्मिन्दा है, 
रात भर दोनों सो न सके


मैं फूल चुनती रही और मुझे खबर ना हुयी
वो शख्स आ के मेरे शहर से चला भी गया
बहुत अज़ीज़ सही उसको मेरी दिल-दारी
मगर ये है कि कभी दिल मेरा दुखा भी गया

चाँद के साथ कई दर्द पुराने निकले
कितने गम थे जो तेरे गम के बहाने निकले
दिल ने इक ईंट से तामीर किया ताजमहल
तूने एक बात कही, लाख फ़साने निकले

Friday, February 19, 2016

मुहब्बत में ख़याल-ए-साहिल-ओ-मन्ज़िल है नादानी,
जो इन राहों में लुट जाए वही तक़दीर वाला है.
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अली अहमद जलीली
अब तो मन्ज़िल भी है ख़ुद गर्म-ए-सफ़र,
हर क़दम संग-ए-निशाँ था पहले.
-नासिर काज़मी
हर मन्ज़िल-ए-हयात से गुम कर गया मुझे,
मुड़ मुड़ के राह में वो तेरा देखना मुझे |
-सागर निज़ामी
तलाश-ए-मन्ज़िल-ए-सब्र-ओ-सुकूँ तो है दिल को,
मिला है राह में लेकिन फ़क़त ग़ुबार मुझे.
-राजीव चक्रवर्ती 'नादान'