Wednesday, March 2, 2016
मुझे दिल दिया तो तड़प भी दे, जो हो दूसरों का शरीके-गम।
मुझे ऐसे दिल की तलब नहीं, जो किसी के काम न आ सके।
भले ही कोई ताजमहल न बनवा सके
,
मुमताज तो हर दिल में बसा करती है।
न खिजाँ में है कोई तीरगी
,
न बहार में कोई रौशनी
,
ये नजर-नजर के चराग है
,
कहीं जल गए
,
कहीं बुझ गए।
Tuesday, March 1, 2016
जहाने-रंगो-बू में क्यों तलाशे-हुस्न हो मुझको
,
हजारों जलवे रख्शिंदा है मेरे दिल के पर्दे में।
-'
शकील
'
बदायुनी
हम अपने दिल के मुकामात से हैं बेगाने
,
इसी में वरना हरम है
,
इसी में बुतखाने।
-
शाद अजीमाबादी
सुकूने -दिल जहाने
–
बेशोकम में ढूढ़ने वाले
,
यहां हर चीज मिलती है सुकूने-दिल नहीं मिलता।
-
जगन्नाथ आजाद
लुत्फे
–
बहार कुछ नहीं गो है वही बहार
,
दिल क्या उजड़ गया कि जमाना उजड़ गया।
-
आर्जू लखनवी
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