Saturday, August 13, 2016

हर कदम पर मुझसे टकराते हैं पत्थर के सनम
क्या भरी दुनिया में इंसान, ऐ खुदा! कोई नहीं

हजारो डूबते है नाखुदाओँ के भरोसे पर
जो खुद चप्पू चलाते है वो अक्सर पार होते है।

तेरे इश्क ने अता की मुझे काईनात ऐ उल्फत
मुझे सबसे दुश्मनी थी तेरी दोस्ती से पहले |


Thursday, August 11, 2016

वादा तो हमसे करते हैं मिलने किसी और से जाते हैं,
कुछ हाजमा अपना भी अच्छा है धोखा रोज़ खाते हैं.

हमने कल ही यह कसम खाई थी,
अब न सहबा को मुंह लगायेंगे।
काश ! पहले यह खबर होती,
आज वह खुद हमें पिलायेंगे।

राह के काँटों से इशक घबराता नहीं ,
क्या क़यामत है दिल को करार आता नही.

Wednesday, August 10, 2016

दुनिया पे ऐसा वक़्त पड़ेगा कि एक दिन,
इन्सान की तलाश में इन्सान जाएगा |

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फ़ना निज़ामी कानपुरी