Monday, September 18, 2017

आज यह कैसी उदासी छाई है! 
तन्हाई के बादल से भीगी जुदाई है!
रोया है फिर मेरा दिल! 
जाने आज किसकी याद आई है!

जब तक तुम्हें न देखूं! दिल को करार नहीं आता!
अगर किसी गैर के साथ देखूं! तो फिर सहा नहीं जाता!

Friday, September 15, 2017

लाख तलवारे बढ़ी आती हों गर्दन की तरफ
सर झुकना नहीं आता तो झुकाए कैसे

ढलती शाम को तेरा मेरे पास से उठ के जाना ,
कल मुझे करना पड़े तेरा इंतज़ार बहुत है .....!

मुहब्बत में दिल को तुम दरिया न बनाओ ..
इश्क की आग ऐसी है यहाँ अक्सर लोग हाँथ जलाते हैं

Monday, September 11, 2017

वीरान रास्तोँ पर चला हूँ मौत के सफर पर
ये एक गम काफी न था जो तोहमत लगा दी बेवफाई की |

पल भर के लिए भी ना किया तुमने इकरार
ख्वाबों में ही करते रहे हम तुमसे प्यार।