Wednesday, October 11, 2017
हम होश खोये हुवे है तो बड़ी बात क्या
आसमाँ खुद परेशां है तुझे जमी पे देखकर
हजारो ख्वाहिशे जगती है दिल मे एक तेरे ख़याल से
और आप है के पूछते हो के क्या आरजू है तुम्हारी
कितने ग़रूर मै है वो मुझे तनहा छोड़ कर
उसे मालूम है मेरे पास कोई नहीं उस के सिवा
Monday, October 9, 2017
स्त्रियों के लिए नही रखता कोई व्रत फिर भी लम्बी उम्र जी लेती हैं करती हैं राधा की तरह प्रेम और मीरा की तरह विष पी लेती हैं!
आज तो सो लू मैं जरा चैन से
सुना है वो जाग रहे है मेरे खयालों मे
क्यो उठाती हो सवाल इन आँखो की लाली पर
ये सुर्खी तेरे लबों की कहाँ सोने देती है मुझको
क्या पता कब
,
कहाँ से मारेगी
बस
,
कि मैं जिंदगी से डरता हूँ
मौत का क्या है
,
एक बार मारेगी
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