Wednesday, November 25, 2020

 बंद लिफाफे में रखी चिट्ठी सी है ये जिंदगी..

पता नहीं अगले ही पल कौन सा पैगाम ले आये।

 उनकी आंखों की गहराई के दीदार न कर पाए।

दिल ने कोशिश तो बहुत की पर बात न कर पाए।

क्या कशिश थी उनकी मासूमियत की मेरे दिल में,

उन्होंने दी इजाजत पर हम आंखें चार न कर पाए।

#शायरियोंकासमंदर

 करो विस्वास तो एक आश हूँ 

वरना जिन्दा एक लाश हूँ 

मुकद्दर के खेल को कोई क्या करे 

जिन्दा रखने वाला एक साँस हूँ 

कभी तो अपने जमीर को भी जगा 

तुम्हें जगाने वाली एक प्यास हूँ 

बिना संगम की अगर तुम्हें मन नहीं 

तो झुमने वाला एक मीठा रास हूँ ........

#शायरियों का समंदर

 जब याद आती है आपकी तो मुस्कुरा लेते हैं, 

कुछ पल के लिए गम भुला लेते हैं, 

कैसे भीग सकती हैं आपकी पलकें, 

जब आपके हिस्से के आँसू हम बहा लेते हैं...

 कुछ सोचूं तो तेरा ख्याल आ जाता है

कुछ बोलूं तो तेरा नाम आ जाता है

कब तक छुपाऊँ दिल की बात

तेरी हर अदा पर मुझे प्यार आ जाता है...

 मिलावट है उनके इश्क मे इत्र और शराब की..

कभी हम महक जाते है कभी हम बहक जाते है..

 वक़्त ने फंसाया है लेकिन मैं परेशान नहीं हूं,

हालातों से हार जाऊ मैं वो इंसान नहीं हूं !!