Wednesday, September 8, 2021

 फूल गुलाब का हाथों में

और होंठो पे मुस्कान


चलो हमसफर चले संग

जिंदगी के बाद जिए हम


फ़िज़ाओं में हो कशिश

जुबां प्रेमगीत गुनगुनाए


बारिश की बूंदों में हो

प्यार की मधुर तरंग


वादा करो लेकर मेरा हाथ

मुड़कर नही देखेंगे गुज़री राह


चाहे हो कोई मौसम

चाहे हो दिन या रात ।।


---- सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, September 7, 2021

 तुझे देख कर

अपनी कविता लिखूं

किस लिये?


स्वय को समंदर

तुझ को मैं सरिता लिखूं

किस लिये?


झुके नयन

और अधरों मे स्मित

किस लिये?


परिचित को

मैं अपरिचिता लिखूं

किस लिये??~


सुनिल #शांडिल्य

Monday, September 6, 2021

 तेरी याद बसी हैं मुझमें ऐसे

.. जैसे कोई पुराना खत


किताब की तह में रखी

.. जैसे सूखे गुलाब की खुशबू


भींगी सावन की बारिश से उठती

.. सोंधी मिट्टी की खुशबू


उन पुराने प्रेम पत्रों की

.. हर तह में हो तुम


तुमसे ये जो जुड़ा है मेरा रिश्ता

.. उसके हर अहसास में हो तुम ।।


#शांडिल्य

Sunday, September 5, 2021

 ये सांझ भी तेरी

ये लाली भी तेरी


चलती हवाओं में

ये महक भी तेरी


दूर रहकर भी, मेरे

दिल में धड़कने तेरी


शब्दों का यूं काफिला

तेरी धड़कनों से गुजरे


लिखे जो मेरी कलम 

तो तेरे संग शब्द भी मेरे झूमे ।।


---- सुनिल #शांडिल्य

Saturday, September 4, 2021

 तुम वो हो

जो मेरे अंतर्मन

को छू पाई हो


तुमने मुझे

उंगलियों के पोर

से नही


मुझे छुआ है

अपने शब्दों से


अपनी आंखों

के मौन से


अनकहे

एहसासों से


बसने लगी हो

तुम मुझमें

और मैं

तुझमें


चल रहे दोनो

कदम दर कदम

एक दूजे की

ओर


शायद मंजिल

हमारी एक दूजे की

पनाहोँ में है..


---- सुनिल #शांडिल्य

Thursday, September 2, 2021

 काश.,

तेरे इश्क़ के समंदर में गोते लगाता

तेरी बाहों में सो पाता


तेरी शबनमी आँखो में खो जाता

शब्द रूपी माला में तुम्हें गूंथता रहता


काश_तुम होती है मैं होता और वक़्त होता

इन ज़ुल्फ़ों की घनेरी रातों में सोता


तेरे गोद में सर रख के

ख़यालों में खोता काश....,


---- #शांडिल्य

Wednesday, September 1, 2021

 मैं रूकने को कहूँ और तू रुक जाए ,

रब ने इतना खुशनसीब नही बनाया मुझे ।।


तुझे हाथ पकड़ कर रोक भी लूं ,

पर ये भी तो  मेरी  तदबीर  नही ।।


गुज़रेंगे दिन कैसे तुमबिन 

मेरे पास तेरी कोई तस्वीर भी तो नहीं ।।


---- #शांडिल्य