Saturday, January 15, 2022

 'दिलकशी' ने उसकी दीवाना बनाया

"उन्स" बनकर दरमियां रूह में छाया


महोब्बत में उसकी फिर में यू गहराया

अक़ीदत-ए-इबादत में खुद को डुबोया


जुनून बनकर वो रूहे जर्रे-जर्रे में समाया

फिर जिन्दा हो भी कहा में जिन्दा कहलाया


हर घड़ी, हर पहर उसकी यादों को सजाया

वो होकर भी गैर हरपल मुझमें ही समाया 


---- सुनिल #शांडिल्य

Thursday, January 13, 2022

 गुफ्तगू उनकी उन रातो की

यादे बन रह गई मेरे दिल की


मस्तानी चाय अल सुबह की

तदबीर बन गई मेरे ख्यालों की


वो रूहानियत उनके इश्क की

रवानीयत बन गई अहसासों की


बेरुखी दरमियां उनकी वफ़ा की

नीर बन गए मेरी जलती आँखों की


लिखू कहानी जो उनके अहसास की

जाने कहा से भर लाती पलके अश्क की 


---- सुनिल #शांडिल्य

Wednesday, January 12, 2022

 महफ़िल तो महज इक बहाना है

मुलाकात-ए-दौर शुरू करवाना है


डूब कर दर्द में हर कोई लिखता है

मुलाकातों की गुफ्तगू में भुलाना है


लफ्ज़ो में सब इंसानियत पिरोते है

हकीकत को जमाने को दिखाना है


"इकदूजे" को सुनना और सुनाना है

तुम अपनी कहना,हमे भी कहना है


---- सुनिल #शांडिल्य

Tuesday, January 11, 2022

 लफ्ज़ और शब्द 

क्या समझे खामोशी की भाषा


बिन कहे कह जाती

खामोशी अपने मन की भाषा


टूटा जो इश्क में

पूछो उसे खामोशी की भाषा


खामोशी क्या होती

समुंदर से गहरी जिसकी आशा


निराशाओं से निकल

सीखी है उसने खामोशी भाषा


---- सुनिल #शांडिल्य

Monday, January 10, 2022

 फ़लसफ़ा-ए-इश्क हर कोई कह गया

जिसने गुजर के देखा इश्क समझ गया


बेजुबाँ सा बिन "लफ्ज़" सब कह गया

टूट के इश्क में खामोशियों में खो गया


दिन के उजालों में अंधेरा वो देख गया

इश्क अँधेरी रातों में उजाला देख गया


आलम बेताबियों में सुकूँ वो देख गया

इंतजार के इक-इक लम्हे को पी गया 


 ---- सुनिल #शांडिल्य

Sunday, January 9, 2022

 चन्द लकीरों की गिरफ्त में है जिन्दगी

किसने देखा कल क्या हो यह जिन्दगी


दरमियां दो साँसों के झूल रही जिन्दगी

किसे पता कब आखरी हो सांस जिन्दगी


चन्द रिश्ते है खास समीप रूह के जिन्दगी

फ़लसफ़ा न करे भुला कर उनको जिन्दगी


---- सुनिल #शांडिल्य

Friday, January 7, 2022

 इंसान पूर्ण कब, कौन हुआ है

इंसान पुतला खामियों का हुआ है


खोजने परमात्मा को कहा चला है

परमात्मा जो तेरा, कहा तुझसे जुदा है


आलिंगन सांसों का जिसने साधा है

अंतहीन,विसर्जन जीवन से मोक्ष पाया है


जीवन रूपी सफर सिर्फ जिस्म ने पाया है

अजय,अमर आत्मा ने सिर्फ चोला बदलवाया है 


---- सुनिल #शांडिल्य